नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 95 शव बरामद; PM मोदी ने बढ़ाया मदद का हाथ, बालेन शाह ने कहा- धन्यवाद भारत
नेपाल में कुदरत का कहर: भारत बना संकटमोचक, पीएम बालेन शाह ने जताया 'बड़े भाई' का आभार
काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल इस वक्त कुदरत के भीषण रूप का सामना कर रहा है। तिब्बत और ऊपरी पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) और भूस्खलन ने देश के कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, नवनिर्मित सड़कें और पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं, और सैकड़ों लोग पानी के तेज बहाव में लापता हैं। रेस्क्यू में जुटी टीमें भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
संकट की इस बेहद कठिन घड़ी में भारत ने एक बार फिर अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) नीति पर अमल करते हुए सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया है।
पीएम नरेंद्र मोदी का संदेश: "हम नेपाल के साथ मजबूती से खड़े हैं"
आपदा की गंभीरता को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पहल की और नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह से टेलीफोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया। पीएम मोदी ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:
"प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात हुई और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जनहानि पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। संकट के इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। हमारी टीमें राहत और बचाव कार्यों पर आपस में मिलकर काम कर रही हैं।"
नेपाल के पीएम बालेन शाह ने जताया भारत का आभार
भारत सरकार की ओर से तुरंत मिली इस संवेदना और मदद के आश्वासन पर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने भारत की इस पहल को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और मजबूत संबंधों का प्रतीक बताया।
पीएम बालेन शाह का जवाब:
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, आपके फोन और संवेदनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। इस कठिन समय में आपकी सहानुभूति भरे शब्दों और नेपाल को दी गई मदद का हम दिल से आभार व्यक्त करते हैं। एकजुटता का यह कदम हमारे दोनों देशों के बीच कायम दोस्ती के स्थायी और मजबूत रिश्तों को दर्शाता है, जिसकी हम बहुत कद्र करते हैं।"
जमीन पर भारत की तत्काल राहत और NDRF की तैनाती
दोनों शीर्ष नेताओं की बातचीत के कुछ ही घंटों के भीतर भारतीय राहत एजेंसियां पूरी तरह एक्शन मोड में आ गईं। भारत द्वारा आपदा प्रभावित इलाकों में निम्नलिखित सहायता भेजी जा रही है:
- NDRF एक्सपर्ट्स अलर्ट पर: भारत की राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष टीमों और वॉटर-रेस्क्यू विशेषज्ञों को सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ते ही ग्राउंड ऑपरेशन में मदद की जा सके।
- इमरजेंसी मेडिकल सप्लाई: बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) के फैलाव को रोकने के लिए जीवनरक्षक दवाएं, फर्स्ट-एड किट्स और लाखों वाटर प्यूरिफिकेशन टेबलेट्स की खेप रवाना कर दी गई है।
- राशन और इमरजेंसी शेल्टर: बेघर हुए परिवारों के लिए वाटरप्रूफ टेंट, कंबल, तिरपाल और रेडी-टू-ईट सूखा राशन सीमावर्ती जिलों के माध्यम से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है।
2015 के भूकंप से लेकर 2026 की बाढ़ तक: हमेशा पहला मददगार बना भारत
इतिहास इस बात का गवाह है कि जब भी नेपाल पर कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आई है, भारत की ओर से सबसे तेज और सबसे बड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली है:
- 2015 का भीषण भूकंप: जब नेपाल में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था, तब भारत ने 'ऑपरेशन मैत्री' चलाकर हजारों लोगों की जान बचाई थी।
- कोविड-19 महामारी: वैश्विक महामारी के समय भारत ने नेपाल को सबसे पहले वैक्सीन की खुराकें और ऑक्सीजन प्लांट उपलब्ध कराए थे।
- 2026 का फ्लैश फ्लड संकट: मौजूदा जलप्रलय में भी भारत राहत सामग्री भेजने वाला पहला देश बना है।
नेपाल में तबाही का जमीनी मंजर
नेपाल के रासुवा, धादिंग, नुवाकोट और गोरखा जैसे पहाड़ी जिले इस समय भारी जलभराव और मलबे की चपेट में हैं। मुख्य मार्गों के बह जाने से कई दूरदराज के गांव नेपाल के बाकी हिस्सों से कट गए हैं। ऐसे में भारत द्वारा दी जा रही लॉजिस्टिकल सहायता और उपकरण स्थानीय प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (SEO FAQs)
Q1. नेपाल में आई इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले कौन से हैं?
उत्तर: इस बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल के रासुवा, धादिंग, नुवाकोट और गोरखा जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
Q2. भारत ने नेपाल को क्या-क्या राहत सामग्री भेजी है?
उत्तर: भारत ने जीवनरक्षक दवाइयां, पानी साफ करने वाली गोलियां, शेल्टर टेंट, कंबल, सूखा राशन और NDRF की रेस्क्यू टीमों को अलर्ट पर रखा है।
Q3. 'ऑपरेशन मैत्री' क्या था?
उत्तर: 'ऑपरेशन मैत्री' वर्ष 2015 में नेपाल में आए भीषण भूकंप के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाया गया एक विशाल राहत और बचाव अभियान था।
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