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नेहा हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा: मायके से लापता हुई युवती का मुंबई के फार्महाउस से मिला कंकाल, हाई कोर्ट के आदेश पर हुई खुदाई

नेहा हत्याकांड की परत-दर-परत कहानी: जौनपुर से मुंबई तक, प्यार, प्रताड़ना और एक फार्महाउस में दफन राज़

विशेष रिपोर्ट | 

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने खाकी की कार्यप्रणाली और इंसानियत दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सिकरारा थाना क्षेत्र के भरसवां गांव से 26 महीने पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई 20 वर्षीय नेहा की मिस्ट्री आखिरकार सुलझ गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्ती के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस मुंबई पहुँची, जहाँ एक फार्महाउस में खुदवाई गई कथित कब्र से इंसानी कंकाल बरामद हुआ। यह पूरा मामला प्रेम प्रसंग, अपहरण, हत्या और पुलिस की सुस्ती का एक खतरनाक कॉकटेल है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।

शादी के कुछ दिन बाद ही लापता हो गई थी नेहा


1. शादी और उसके बाद शुरू हुआ लापता होने का सिलसिला

  • शुरुआत: मृतका नेहा (20 वर्ष) पुत्री शोभनाथ बिंद की शादी कुछ समय पहले राजस्थान के कोटा जिले के रहने वाले 'भारत' नाम के युवक के साथ हुई थी।
  • मायके वापसी: शादी के महज पाँच दिन बाद ही परिजन नेहा की विदाई कराकर उसे अपने घर (सिकरारा थाना क्षेत्र के भरसवां गांव) ले आए थे।
  • पहला गायब होना: ग्रामीणों के अनुसार, नेहा का गांव के ही अरविंद बिंद से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इससे पहले भी दोनों एक बार घर से भाग चुके थे। हालांकि, तब स्वजन के दबाव और गांव में हुई पंचायत के बाद नेहा वापस लौट आई थी, जिसके बाद उसकी शादी तय की गई थी। लेकिन शादी के कुछ ही दिन बाद 25 जून 2024 को नेहा एक बार फिर रहस्यमय तरीके से लापता हो गई।

2. परिवार के आरोप और पुलिस की शुरुआती लापरवाही

नेहा के अचानक गायब होने के बाद उसकी मां भगना देवी उर्फ मगना ने थाने में लिखित तहरीर दी। तहरीर में गांव के ही अरविंद बिंद, उसके पिता राम आसरे, माता सोना देवी, भाई अरुण और महराजगंज थाना क्षेत्र के उमरी गांव निवासी उसके रिश्तेदार राज कुमार बिंद पर षड्यंत्र के तहत अपहरण करने का गंभीर आरोप लगाया गया।

  • धमकी भरे कॉल्स: पीड़ित मां का कहना था कि लापता होने के कुछ समय बाद नेहा ने उन्हें फोन किया था और रोते हुए बताया था कि आरोपी उसे जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं।
  • खौफनाक कबूलनामा: कुछ दिनों बाद नेहा का फोन आना पूरी तरह बंद हो गया। घबराई मां ने 3 जनवरी 2025 को आरोपी अरविंद के मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। आरोप है कि फोन पर अरविंद ने बेहद बेबाकी और दुस्साहस के साथ कहा— "नेहा की हत्या कर दी है, जो करना हो कर लो।"
  • कानून की सुस्ती: मां ने पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन स्थानीय थाने की पुलिस टालमटोल करती रही। आखिरकार मजबूर होकर भगना देवी ने न्यायालय की शरण ली। अदालत के आदेश पर 4 जुलाई 2025 को पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन इसके बाद पुलिस ने इस मामले में आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

3. इलाहाबाद हाई कोर्ट का चाबुक: 'जिंदा या मुर्दा पेश करो'

जिला न्यायालय में मुकदमा चलने के बावजूद जब छह महीने तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा, तब न्याय की आस में भगना देवी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

  • कोर्ट का कड़ा रुख: मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जौनपुर के एसपी कुंवर अनुपम सिंह और सिकरारा थाना प्रभारी को तलब किया और स्पष्ट निर्देश दिए कि नेहा को 'जिंदा या मुर्दा' अदालत में पेश किया जाए।
  • पुलिस की नींद टूटी: हाई कोर्ट का कड़ा आदेश मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में एसपी ने केस की विवेचना कर रहे थाने के उपनिरीक्षक राम नेवास के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया और उसे तुरंत मुंबई के लिए रवाना किया गया।

4. मुंबई के फार्महाउस में दफन था राज़

मुंबई पहुँचने पर पुलिस ने मुख्य आरोपी अरविंद बिंद को अपनी गिरफ्त में ले लिया। पूछताछ में परतें खुलती चली गईं।

  • फार्महाउस का सच: आरोपी अरविंद मुंबई के दायघर थाना क्षेत्र के एक फार्महाउस की देखरेख (केयरटेकर) का काम करता था। नेहा के भागने के बाद वह उसे इसी फार्महाउस पर ले आया था।
  • निशानदेही पर खुदाई: पुलिस टीम ने आरोपी को साथ लिया और मुंबई पुलिस के सहयोग से उसी फार्महाउस पर पहुँची। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने एक विशेष स्थान पर खुदाई शुरू कराई।
  • कंकाल बरामद: जमीन खोदने पर वहां से एक इंसानी कंकाल बरामद हुआ। शव अत्यधिक गल-सड़ जाने और कंकाल में तब्दील हो जाने के कारण मौके पर पोस्टमार्टम कराना संभव नहीं हो सका। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने पहचान सुनिश्चित करने और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट (DNA Test) के सुरक्षित सैंपल ले लिए हैं।

5. बार-बार बयान बदलता रहा मुख्य आरोपी अरविंद

पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपी अरविंद बार-बार अपने बयान बदलकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा। उसके बयानों में लगातार विरोधाभास देखा गया:

  1. पहला बयान: उसने दावा किया कि नेहा उससे सच्चा प्यार करती थी और मुंबई आने के बाद भी वह अपने परिवार के संपर्क में थी और मोबाइल पर बात करती थी।
  2. दूसरा बयान: उसने आगे कहा कि जब उसने नेहा को समझाने या रोकने की कोशिश की, तो उसने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली।
  3. तीसरा बयान: उसने यह भी कहा कि छत से गिर जाने के कारण उसकी मौत हो गई थी।
  4. असली सच: अंत में उसने स्वीकार किया कि पुलिस कार्रवाई और डर के साये में उसने फार्महाउस के अंदर ही गड्ढा खोदकर नेहा के शव को चुपचाप दफना दिया था ताकि किसी को कानों-कान खबर न हो।

निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति

मुंबई के फार्महाउस से कंकाल मिलने और नेहा की मौत की पुष्टि की खबर जैसे ही उसके पैतृक गांव सिकरारा के भरसवां पहुँची, मृतका के घर में कोहराम मच गया। माता-पिता और स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है।

अब सबकी नजरें फोरेंसिक रिपोर्ट और डीएनए टेस्ट पर टिकी हैं, जो यह साबित करेगा कि बरामद कंकाल नेहा का ही था या नहीं। इस सनसनीखेज वारदात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कानून के हाथ भले ही लंबे होते हैं, लेकिन कई बार न्याय पाने के लिए पीड़ित परिवार को लंबी और दर्दनाक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।

नोट: इस गंभीर मामले की आगे की अपडेट्स के लिए हमारी नजरें लगातार बनी हुई हैं।

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